सफलता उन्हीं को मिलती है जो मेहनत से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही उदाहरण हैं प्रणव यादव, जिन्होंने अपनी काबिलियत से न्यूरो-इनसाइट जैसी अनोखी कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी ब्रेन-मैपिंग तकनीक से यह समझने में मदद करती है कि लोग विज्ञापनों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। उनकी तकनीक का इस्तेमाल गूगल, ट्विटर, यूनिलीवर जैसे ब्रांड करते हैं।

भारत में जन्मे प्रणव को एशिया में टॉप करने के बाद प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने तीन मेजर के साथ स्नातक किया। उन्होंने Goldman Sachs में काम किया लेकिन बाद में खुद की पहचान बनाते हुए न्यूरो-इनसाइट के सीईओ बने। उनकी कहानी मेहनत और इनोवेशन की मिसाल है।

न्यूरो-इनसाइट और प्रणव की सफलता के मुख्य आधार डॉ. रिचर्ड सिल्बरस्टीन है। उन्होंने उन्हें कंपनी की ब्रेन-मैपिंग तकनीक का नेतृत्व करने के लिए सीईओ का पद प्रदान किया। उस समय प्रणव अपने वीजा प्रतिबंधों से जूझ रहे थे। भारत वापस भेजे जाने के बाद प्रणव ने उस समय की याद ताजा करते हुए कहते हैं कि, “90 दिन की अवधि के 89 वें दिन मुझे नौकरी मिली, न्यूरो-इनसाइट के अध्यक्ष वास्तव में बहुत खुश थे कि कोई 25 साल के बच्चे की सिफारिश कर रहा है जिसका कोई अनुभव नहीं है। दो घंटे की बैठक के अंत में उन्होंने कहा, यू आर सेलेक्टिड, आप मेरे सीईओ हैं। इससे उनके लिए बेहतर टेलीविज़न विज्ञापन बनाने  और विपणन प्रोत्साहन को समझने के दरवाजे खुल गए।

प्रणव ने मार्केटिंग की जानकारी एकत्र करने के लिए ब्रेन-मैपिंग तकनीक विकसित की। जिससे  ब्रांडों को पता चलता है कि उपभोक्ताओं के दिमाग में मार्केटिग को लेकर क्या चल रहा है। इससे बेहतर सेल्स प्राप्त करने में मदद मिलती है। न्यूरो-मार्केटिंग उपभोक्ता वरीयताओं के "ईमानदार" संकेतक खींचता है। यादव कहते हैं, "लोगों को यह भी पता नहीं है कि वे कैसे और क्यों वे निर्णय लेते हैं"।

प्रणव कहते हैं कि न्यूरो-इनसाइट बता सकता है कि क्या आपका ब्रांड संक्षिप्त डेटा का एक सेट खींचकर प्रतिध्वनित करता है या नहीं। यह दो काम करता है। यह डायग्नोस्टिक है। हम लोगों को बता सकते हैं कि उनके विज्ञापन के साथ क्या करना है ताकि वे इसे अनुकूलित कर सकें और यह भविष्य बताने वाला है। यह बाजार की सफलता की भविष्यवाणी कर सकता है। प्रणव यादव का नाम आज फोर्ब्स की अंडर 30 बिज़नेसमैन की सूची में है।

प्रणव ने अपनी काबिलियत के दम पर अपनी सफलता की कहानी (Success Story) लिखी है। वो कहते हैं कि हंसने की भावना रखने से आपको कठिन समय से निपटने में मदद मिलती है। वर्क-लाइफ बैलेंस के महत्व के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं, “मुझे खुद को ऑफिस छोड़ना, वर्कआउट करने के लिए समय निकालना और दोस्तों से मिलना-जुलना जैसे कामों पर ध्यान केंद्रित न करने की सलाह देना सिखाना था। अक्सर यह आपको डॉट्स कनेक्ट करने की क्षमता देता है और उन विचारों और समाधानों के साथ वापस आता है जो आपके डेस्क पर बैठने के दौरान नहीं आ सकते। प्रणव यादव का जीवन सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) है। कुछ हटकर करने की चाह ने प्रणव की सफलता की कहानी (Success Story) लिखी है।

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