अचिंता का सफर आसान नहीं था—11 साल की उम्र में पिता का साया उठ गया और परिवार का खर्च चलाने के लिए उनकी मां और भाई ने कपड़े सिलने का काम शुरू किया।

लेकिन कठिन हालातों के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार ने उन्हें वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दिलवाई और अचिंता ने अपने जुनून से पुरुषों के 73 किलो वर्ग में 143 किलो वजन उठाकर नया रिकॉर्ड बना डाला।

यह कहानी है एक साधारण लड़के की, जिसने संघर्ष से सफलता तक का सफर तय कर देश का नाम रोशन किया।

बचपन में ही पिता का छूट गया था साथ

  • 24 नवंबर 2001 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा के झोपडपट्टी के एक निम्न वर्गीय परिवार में जन्में अंचिता के पिता रिक्शा चलाते थे। लेकिन परिवार की परिस्थितियां अनुकूल ना होने के वाबजूद अचिंता के सपने हमेशा से बड़े थे।
  • वो जब 10 साल के थे तो अपने बड़े भाई को जिम में वेटलिफ्टिंग करते देखते थे तो उनका मन भी करता था कि वो भी वेटलिफ्टिंग करें। इसलिए उनके पिता और भाई ने उन्हें ट्रेनिंग दिलवाने की सोची।
  • लेकिन जब अचिंता 11 साल के हुए तो उनके पिता का देहांत हो गया। पिता के गुजरने के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई। घर चलाने के लिए उनके बड़े भाई को अपना कॉलेज छोड़ना पड़ा। उनकी मां और भाई ने घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी उठाई।

 मां और भाई ने संघर्ष कर दिलाई ट्रेनिंग

  • घर की स्थिति खराब होने के बाद भी अचिंता के मां और भाई ने उनके सपनों को टूटने नहीं दिया और उन्हें वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दिलवाई।
  • उनकी मां ने घरों में काम किया साथ ही साड़ी पर जरी का काम करके घर चलाया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
  • नेशनल लेवल के पूर्व वेटलिफ्टर अस्तम दास ने अचिंता को फ्री में ट्रेनिंग दी। वो वेटलिफ्टिंग के लिए इतने समर्पित थे कि उन्होंने इसके लिए अपनी बीएसएफ की नौकरी तक छोड़ दी थी।

अचिंता शेउली ने कॉमनवेल्थ गेम्स में बनाया रिकॉर्ड

  • अचिंता शेउली ने शुरुआत से ही बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनके सामने विरोधी कहीं भी टिक नहीं पाए।
  • 20 साल के अचिंता शेउली ने स्नैच में 143 किलो वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड वनाया है।
  • अचिंता से पहले इतना वजन किसी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में नहीं उठाया था। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 170 किलो समेत कुल 313 किलो वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया है।

संघर्ष करते हुए पहुंचे जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में

  • वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग लेते समय अचिंता शेउली को अच्छी डाइट के लिए भी कई बार संघर्ष करना पड़ा।
  • जब अचिंता चिकन की मांग करते थे तो उनके पास इतने पैसे तक नहीं होते थे कि वह चिकन खरीद सकें। इसलिए दोनों भाईयों को कई बार मजदूरी भी करनी पड़ी।
  • दोनों भाई गांव वालों के खेत से धान उठाकर घर रखकर आते थे ताकि उससे मिले मेहनताने से वह चिकन खरीद सके। किसी तरह अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद साल 2018 में अचिंता ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स का Gold पदक जीता।
  • उन्होंने साल 2019 में जूनियर और सीनियर दोनों कैटेगरी में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर सीनियर स्तर पर अपना पहला बड़ा पदक जीता। अचिंता ने पिछले साल 2021 में ताशकंद में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के पुरुषों के 73 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीना था। इसके अलावा अचिंता ने पिछले साल के अंत में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में 73 किग्रा चैंपियन बने थे।

 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड मेडल

इतनी सी उम्र में कई ट्रॉफी जीतने वाले अचिंता शेउली ने बर्मिंघम के कॉमनवेल्थ गेम्स भी Gold पदक जीत कर नया इतिहास रच दिया। शेउली ने स्नैच वर्ग में 137 किग्रा, 140 किग्रा और 143 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने 143 किग्रा के प्रयास से खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया और अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में भी सुधार किया। उन्होंने वेटलिफ्टिंग के क्लीन एंड जर्क में 166 किग्रा भार आसानी से उठाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

एक गरीब परिवार से आने वाले अचिंता शेउली ने आज अपनी मेहनत और लगन के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है। उन्होंने अपनी मेहनत से यह बता दिया कि अगर इंसान जीवन में कुछ पाना चाहे तो कोई भी परिस्थिति उसके समक्ष बाधा नहीं बन सकती। आज पूरे देश को अचिंता पर गर्व है। लेख के बारे में आप अपनी टिप्पणी को कमेंट सेक्शन में कमेंट करके दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा आप अगर एक व्यापारी हैं और अपने व्यापार में कठिन और मुश्किल परेशानियों का सामना कर रहे हैं और चाहते हैं कि स्टार्टअप बिज़नेस को आगे बढ़ाने में आपको एक पर्सनल बिज़नेस कोच का अच्छा मार्गदर्शन मिले तो आपको PSC (Problem Solving Course) का चुनाव जरूर करना चाहिए जिससे आप अपने बिज़नेस में एक अच्छी हैंडहोल्डिंग पा सकते हैं और अपने बिज़नेस को चार गुना बढ़ा सकते हैं।