जानिए दिल्ली की IAS रिशिता गुप्ता की सफलता की कहानी

बचपन में रिशिता का सपना थी कि डॉक्टर बनें लेकिन धीरे-धीरे समय बदलने के साथ ही उनके सपने भी बदलते गए। इसकी एक वजह यह भी थी कि उनके जीवन में एक ऐसा कठिन समय भी आया जब उनकी हिम्मत और हौंसला टूट गया था पर रिशिता अपने इस बुरे समय से लड़ी और आगे बढ़ती रहीं। लेकिन अपनी मेहनत के दम पर आज वो एक IAS अफ़सर हैं और कई लोगों के लिए प्रेरणा भी हैं।

पिता को खोने के बाद, रिशिता की ब़ढ़ गई जिम्मेंदारी

रिशिता गुप्ता का सपना था कि वो मेडिकल फील्ड में अपना करियर बनाएं एक अच्छी डॉक्टर बने। बचपन से इस सपने के साथ बड़ी हो रहीं रिशिता का ये सपना तब टूट गया जब वो 12वीं क्लास में थीं। उनके पिता की कैंसर के कारण मृत्यु हो गई, ये दुखों का पहाड़ ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।

पिता के जाने से सबसे बड़ी बाधा उनकी पढ़ाई में आई। रिशिता ने मेडिकल सीट के लिए परीक्षा तो दी लेकिन पिता के जाने के बाद वो पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई नहीं कर सकीं जिसके कारण मेडिकल सीट के लिए जरूरी रैंक वो हासिल नहीं कर पाईं।

मेडिकल सीट हासिल ना होने के बाद भी RISHITA GUPTA ने हालातों के सामने हार नहीं मानी और आगे की पढ़ाई को शुरू किया। इंग्लिश ऑर्नर्स में उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई की और फिर यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

इस बार RISHITA GUPTA ने सफलता पाने के लिए दृढ़ निश्चय कर लिया था जिसके लिए उन्होंने हर संभव तरीके से तैयारी भी की। यूपीएससी की परीक्षा से जुड़े हर एक जरूरी पहलू को समझा। उन्होंने मैथोडिकल अप्रोच को अपनाया, खुद नोट्स तैयार किए, खुद डमी टेस्ट दिए और साथ तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स की गलतियों से सीखा और खुद वो गलतियां नहीं की।

मां-बाप की परवरिश ने बदली ज़िंदगी

RISHITA GUPTA की मेहनत और लगन यूपीएससी की परीक्षा में रंग लेकर आई। साल 2018 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी, उनकी तैयारी इतनी मजबूत थी कि पहली बार में ही यूपीएससी सीएसई में ऑल इंडिया रैंक 18 को हासिल किया।

आज वो एक आईएएस के पद पर सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इस सफलता का श्रेय रिशिता गुप्ता आज अपनी तैयारी के साथ साथ अपने माता-पिता की सीख और परवरिश को भी देती हैं।