हमारे देश की अर्थव्यवस्था को कृषि आधारित अर्थव्यवस्था कहा जाता है क्योंकि यहाँ की आबादी का अधिकतर हिस्सा कृषि कार्यों में संलग्न है और इसी पर निर्भर है. लेकिन पिछले कुछ दशकों में इस निर्भरता में काफी बदलाव आया है. अब देश के आर्थिक विकास में केवल कृषि क्षेत्र की भूमिका नहीं है बल्कि अब आंत्रप्रेन्योर की भूमिका भी बेहद खास हो गई है. कई मामलों में देश के इकोनॉमिक डेवेलेपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए आंत्रप्रेन्योर काफी मदद कर रहा है. इसी बदलाव को देखते हुए ही आंत्रप्रेन्योरशिप कोर्सेस (Online Business Courses for Entrepreneurs) की भारी मांग भी युवाओं के बीच होने लगी है.

रोजगार की होती है उत्पत्ति (Generate Employment Directly & Indirectly)

किसी भी देश या राज्य की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी होती है. लेकिन Entrepreneur इस बड़ी समस्या को दूर करने में सबसे ज्यादा मदद करता है. वह डॉयरेक्टली और इन डॉयरेक्टली दोनों ही तरीके से रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है. डॉयरेक्टली वह खुद को एक व्यापारी के रूप में स्थापित करता है और नौकरी की तलाश से बचता है. इन डॉयरेक्टली वह दूसरे लोगों के लिए  नौकरियाँ तैयार करता है. इस तरह से देश की सबसे बड़ी समस्या कही जाने वाली बेरोजगारी को एक बड़ा समाधान मिल जाता है. व्यक्ति नौकरी तो पाता ही है साथ ही अपने कौशल विकास में भी वृद्धि करता है.

आर्थिक स्वतंत्रता पाने में मिलती है मदद (Economic Independent)

आंत्रप्रेन्योरशिप कई तरीके से देश को आगे बढ़ाने के लिए काम करती है. जिसमें आर्थिक स्वतंत्रता सबसे अहम होती है. दूसरे देशों के प्रोडक्ट्स और सर्विस पर से निर्भरता को कम करना या खत्म करना आंत्रप्रेन्योर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. Entrepreneur जब अपने देश या राज्य में प्रोडक्ट्स फिर सर्विसेस के निर्माण की शुरुआत करता है तो दूसरे देशों पर निर्भरता कम होती है. जब देश में ही सर्विस और प्रोडक्ट्स का निर्माण होता है तो देश या राज्य के लोगों को नौकरी के अवसर भी उपलब्ध होते हैं और प्रोडक्ट्स या सर्विसेस के मैन्यूफैक्चरिंग दामों में भी कमी आती है और इसी से आर्थिक स्वतंत्रता मिलती है. जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर होता है. देश की इकोनॉमी में ग्रोथ होती है.

प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी (Increment in Per Capita Income)

Entrepreneur वह व्यक्ति होता है, जो कम साधनों में भी बेहतरीन अविष्कारों  की खोज कर लेता है. अपनी समझ और स्किल्स से Entrepreneur सही साधनों को भली प्रकार से उपयोग कर नए अवसरों का निर्माण करता है, जैसे नए प्रोडक्ट्स या फिर सर्विस, और फिर यही तरीके लोगों की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी करने का का करते हैं. यहीं से उनके खान-पान के स्तर में भी बढ़ोतरी होती है और फिर प्रति व्यक्ति आय से ही आर्थिक विकास को मापा जाता है.

आर्थिक विकास के साथ ही सामाजिक विकास में भी वृद्धि (Community Development)

Entrepreneur आर्थिक विकास को डॉयरेक्टली और सामाजिक विकास को इनडॉयरेक्ली तरीके से सपोर्ट करता है, जिससे देश को सामाजिक और आर्थिक दोनों ही तरीके से सपोर्ट मिलता है. देश आर्थिक तौर पर भी तभी विकसित हो पाएगा जब वह सामाजिक तौर पिछड़ेपन से दूर होगा. आंत्रप्रेन्योर हमेशा इस बात को बखूबी समझते भी हैं और इस पर काम भी करते हैं. देश के भीतर ही बेहतर स्किल्स और कोशल युक्त मैनपावर को निर्मित किया जा सके, इसके लिए कई सेक्टरों जैसे की, हैल्थकेयर और टैक्नीकल ट्रैनिंग स्कूल्स में आंत्रप्रेन्योर अपना नैतिक कर्तव्य मानकर इनवेस्ट करते हैं. जिससे युवाओं के बेहतर भविष्य पर काम किया जाता है. इस तरह से आर्थिक और सामाजिक, दोनों ही क्षेत्रों में एक आंत्रप्रेन्योर अपना योगदान देता है. भारत में ऐसे कई उद्योगपति हैं, जो आंत्रप्रेन्योर के साथ एक अच्छे फिलांत्रोपिस्त भी हैं औज देश के विकास में अपनी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं.

इस तरह से किसी भी देश के आर्थिक विकास में आंत्रप्रेन्योर की एक बड़ी भूमिका होती है. रोजगार उत्पत्ति से लेकर, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, आर्थिक स्वतंत्रता में बढ़ोतरी और सामाजिक विकास में वृद्धि में भी एक कारोबारी बड़ा खास रोल अदा करता है. इसी वजह से युवाओं का आंत्रप्रेन्योरशिप कोर्सेस (Entrepreneurship Course) के प्रति रूझान काफी बढ़ने लगा है.

लेख के बारे में आप अपनी टिप्पणी को कमेंट सेक्शन में कमेंट करके दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा आप अगर एक व्यापारी हैं और अपने व्यापार में किन्ही जटिल और मुश्किल परेशानियों का सामना कर रहे हैं तो आप Problem Solving Course के माध्यम से उन्हें दूर कर सकते हैं और अपने कारोबार को परेशानीमुक्त कारोबार बना सकते हैं.