रितेश अग्रवाल, भारत के सबसे युवा और सफल उद्यमियों में से एक हैं, जिन्होंने OYO Rooms की स्थापना करके हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में क्रांति ला दी। मात्र 19 साल की उम्र में अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले रितेश आज दुनिया के सबसे बड़े होटल ब्रांड्स में से एक के मालिक हैं। उनकी कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और इनोवेशन का प्रतीक है।

शुरुआती जीवन और परिवार

रितेश का जन्म 16 नवंबर 1993 को ओडिशा के एक छोटे से शहर बिसामकट्टक में हुआ था। उनका परिवार मध्यमवर्गीय था, और वे एक पारंपरिक माहौल में पले-बढ़े। उन्हें बचपन से ही टेक्नोलॉजी और बिजनेस में रुचि थी।

उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस एंड फाइनेंस, दिल्ली में दाखिला लिया, लेकिन कुछ ही समय में पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उनका ध्यान बिजनेस आइडिया पर था।

शुरुआती संघर्ष

रितेश का सपना हमेशा कुछ अलग करने का था। उन्होंने 18 साल की उम्र में भारत घूमने का फैसला किया और बजट होटल्स में रहने लगे। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि भारतीय बजट होटल्स में बहुत सारी समस्याएं हैं, जैसे:

साफ-सफाई की कमी
सर्विस की खराब क्वालिटी
स्टैंडर्ड सुविधाओं का अभाव

इन्हीं समस्याओं से प्रेरित होकर उन्होंने Oravel Stays नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया, जो एयरबीएनबी की तर्ज पर भारत में बजट होमस्टे उपलब्ध कराता था।

OYO की शुरुआत

2013 में, उन्होंने Oravel Stays का नाम बदलकर OYO Rooms (On Your Own) कर दिया और बजट होटल्स को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का फैसला किया। उन्होंने होटल मालिकों के साथ साझेदारी करके उनकी सर्विसेस को बेहतर बनाया और उन्हें OYO ब्रांड के तहत लिस्ट किया।

OYO की खासियत थी कि यह ग्राहकों को कम कीमत में बेहतर सुविधाएं और भरोसेमंद सेवा प्रदान करता था। इसका फायदा यह हुआ कि लोग तेजी से इस ब्रांड की ओर आकर्षित होने लगे।

पहली बड़ी सफलता

OYO को शुरुआती निवेश VentureNursery और Lightspeed Venture Partners जैसी कंपनियों से मिला। लेकिन असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब SoftBank ने OYO में बड़ा निवेश किया। इससे OYO तेजी से भारत में और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने लगा।

कुछ अहम आंकड़े:

2015: OYO ने भारत के 100 शहरों में 10,000 से अधिक कमरों को जोड़ा।
2017: OYO ने चीन, मलेशिया और नेपाल में अपने ऑपरेशन शुरू किए।
2018: OYO की वैल्यू $1 बिलियन से ज्यादा हो गई और यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ता स्टार्टअप बन गया।
2019: OYO ने अमेरिका और यूरोप में एंट्री की और दुनियाभर में अपने होटल्स की संख्या बढ़ाई।

चुनौतियाँ और असफलताएँ

हर सफल उद्यमी की तरह, रितेश को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा:

1. फाइनेंशियल लॉस: 2020 में COVID-19 के दौरान OYO को भारी नुकसान हुआ, क्योंकि ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ठप पड़ गई थी।
2. लीगल समस्याएँ: कई देशों में OYO के बिजनेस मॉडल को लेकर विवाद हुए।
3. मैनेजमेंट क्राइसिस: तेजी से ग्रोथ के कारण मैनेजमेंट में कई चुनौतियाँ आईं, जिससे कई कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी।

लेकिन रितेश ने हर मुश्किल का डटकर सामना किया और OYO को दोबारा सफल बनाया।

OYO का वर्तमान और भविष्य

आज OYO 80+ देशों में काम कर रहा है और 1 लाख से ज्यादा होटल्स और होमस्टे इसके प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड हैं। कंपनी लगातार नई तकनीकों और बिजनेस मॉडल्स के जरिए अपनी सेवाओं को बेहतर बना रही है।

कुछ हालिया उपलब्धियाँ:

OYO Wizard: कंपनी का लॉयल्टी प्रोग्राम, जिससे ग्राहकों को बेहतर डील्स मिलती हैं।
OYO Workspaces: को-वर्किंग स्पेस बिजनेस की शुरुआत।
OYO Townhouse: एक नया ब्रांड जो प्रीमियम बजट होटल्स प्रदान करता है।

                            OYO की ग्रोथ (2015-2024)

यह ग्राफ़ दिखाता है कि 2015 से 2024 तक OYO ने कितनी तेजी से अपने होटल्स की संख्या बढ़ाई है।

रितेश अग्रवाल की सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी मेहनत, साहस और बिजनेस माइंडसेट ने उन्हें भारत के सबसे सफल उद्यमियों में शामिल कर दिया है।

बड़ा बिजनेस भी इसी सोच के साथ छोटे व्यवसायों और नए उद्यमियों का समर्थन करता है, ताकि हम मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूत बना सकें।